बेरोजगारी क्या है, बेरोजगारी का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं प्रभाव

बेरोजगारी क्या है यह सवाल आपके मन में आया है तो फिर इस पोस्ट में आपको बेरोजगारी के बारे में संपूर्ण जानकारी मिलने वाली है बेरोजगारी कई तरह की हो सकती है जिसके बारे में आज हम विस्तार के साथ बात करने वाले हैं.

बेरोजगारी शब्द आपने अक्सर टीवी पर सुना होगा अपने करीबियों के पास सुना होगा यहां तक कि आपने अखबार किसी मैगजीन में बेरोजगारी के बारे में पढ़ा होगा जैसा कि हमने आपको बताया कि बेरोजगारी कई तरह की हो सकती है.

अब आप पोस्ट के शुरू में यह सोचने लगे होंगे कि बेरोजगार तो बेरोजगारी होती है बेरोजगारी कई तरह की कैसे हो सकती है तो इसका भी जवाब हम इस पोस्ट में आपको देने वाले हैं.

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बेरोजगारी क्या है बेरोजगारी का अर्थ, परिभाषा, प्रकार एवं प्रभाव

Berojgari Kya Hai

बेरोजगारी दुनिया के कई देशों की समस्या है इससे हमारा देश भारत भी अछूता नहीं है भारत में भी बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है आज हम बेरोजगारी क्या है इसकी क्या परिभाषा है इसका क्या प्रभाव आप पर पड़ सकता है इसके बारे में विस्तार से बात करते हैं.

सबसे पहले तो हम आपको बेरोजगारी क्या है इस बारे में बता देते हैं बेरोजगारी उसे नहीं कहा जाएगा मान लीजिए कोई व्यक्ति जब मजदूरी 100 रूपये दिन की होती है लेकिन उस मजदूर को 90 रूपये दिन के मिले तो हम उसे बिल्कुल भी बेरोजगार नहीं कह सकते है.

बेरोजगार उसे ही हम कह सकते हैं जो काम करना चाहता है लेकिन उसके पास कोई काम ही नहीं ऐसी अवस्था वाले व्यक्ति अथवा काम करने वाला इच्छुक मजदूर को ही हम बेरोजगार मान सकते हैं.

बेरोजगारी का अर्थ क्या है

बेरोजगारी क्या है: अब आप यह तो समझ चुके होंगे कि यदि किसी मजदूर के पास कोई काम नहीं है और वह काम करना चाहता है तो उसे हम बेरोजगार मान सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि जो काम करना चाहता है लेकिन वह बीमार है विद्यार्थी है नाबालिक है तो फिर हम उन्हें बेरोजगारी की के श्रेणी में नहीं रख सकते हैं.

क्योंकि हम बेरोजगार उसी को मान सकते हैं जो काम करने के योग्य है काम करने के लिए इच्छुक है और वर्तमान स्थिति में काम करने को तैयार है.

बेरोजगारी की श्रेणी में बड़े बुजुर्ग, बीमार, विद्यार्थियों को शामिल नहीं कर सकते हैं क्योंकि वह काम करने के योग्य नहीं है हालांकि ऐसा नहीं है कि कोई छोटी उम्र का बच्चा काम नहीं कर सकता है यकीनन वह काम कर सकता है लेकिन उसे बेरोजगार नहीं मान सकते है.

बेरोजगारी की परिभाषा क्या है

प्रोफेसर. पीगू के अनुसार: व्यक्ति को उस समय ही बेरोजगार कहा जाएगा जब उसके पास कोई रोजगार का साधन नहीं है.

बायरस तथा स्टोन के अनुसार:  बेरोजगारी तब होती है जब लोग काम करने के योग्य होते हैं तथा अपनी योग्यता वाले लोगों को दी जाने वाली वर्तमान मजदूरी की दर को इच्छापूर्वक स्वीकार करने को तैयार होते हैं.

राफिन तथा ग्रेगोरी के अनुसार: बेरोजगार व्यक्ति वह व्यक्ति है जो वर्तमान समय में काम नहीं कर रहा जो सक्रिय ढंग से कार्य की तलाश में है.

बेरोजगारी के कितने प्रकार हैं

इस पोस्ट के शुरू में ही हमने एक बात कही थी कि बेरोजगारी कई प्रकार की हो सकती है तो चलिए अब हम इस सवाल का जवाब आपको दे देते हैं और आपको बताते हैं कि बेरोजगारी के कितने प्रकार हैं.

शिक्षित बेरोजगारी: हमारे देश में शिक्षित बेरोजगार लोगो की तादात ज्यादा है हमारे देश में कई शिक्षित लोगो काम की तलाश में होते हैं लेकिन फिर भी उन्हें कोई काम नहीं मिलता ऐसे लोगो को हम शिक्षित बेरोजगार कह सकते है.

ऐच्छिक बेरोजगारी:  जब श्रमिक मजदूरी को वर्तमान दर पर काम करने के लिए तैयार न हो अथवा काम होने पर भीअपनी इच्छा से काम न करना चाहे तो ऐसी बेरोजगारी, ऐच्छिक बेरोजगारी कहलायेगी.

अनैच्छिक बेरोजगारी: अनैच्छिक बेरोजगारी वह स्थिति है जिसमें श्रमिक मजदूरी की वर्तमान दर पर काम करने को तैयार हो परन्तु उन्हें काम नहीं मिले इसे खुली बेरोजगारी भी कहते हैं.

घर्षात्मक बेरोजगारी:  घर्षात्मक बेरोजगारी वह बेरोजगारी है जिसका संबंध एक गतिशील अर्थव्यवस्था में कार्य या नौकरी को बदलने से होता है.

सरंचनात्मक बेरोजगारी: संरचनात्मक बेरोजगारी वह बेरोजगारी है जो कछु उद्योगों के दीर्घकालीन ह्रास के कारण उत्पन्न होती है यह बेरोजगारी अर्थव्यवस्था के संरचनात्मक ढांचे से सम्बन्धित है.

चक्रीय बेरोजगारी:  चक्रीय बेरोजगारी वह बेरोजगारी है जो सामान्यतया अर्थव्यवस्था की मन्दी की अवस्था के कारण उत्पन्न होती है यह बेरोजगारी देश में चक्रीय परिवर्तनों अर्थात मंदी तथा तेजी के कारण उत्पन्न होती है.

मौसमी बेरोजगारी और तकनीकी बेरोजगारी क्या है

मौसमी बेरोजगारी: मौसमी बेरोजगारी वह बेरोजगारी है जो कुछ व्यवसायों में श्रमिक की मांग वर्ष के कुछ समय के लिए होती है इस प्रकार की बेरोजगारी में लोग वर्ष के कुछ विशेष मौसम में बेरोजगार रहते हैं परन्तु बाकी समय उन्हें रोजगार मिलता रहता है.

तकनीकी बेरोजगारी: तकनीकी बेरोजगारी यह बेरोजगारी जो तकनीकी परिवर्तनों के कारण उत्पन्न होती है आधुनिक तकनीकी इसके फलस्वरूप श्रम का स्थान मशीनें ले रही हैं तकनीकी बेरोजगारी से ही काफी देशो में बेरोजगारी आती है.

खुली बेरोजगारी: इस प्रकार की बेरोजगारी में श्रमिक के पास कोई काम नहीं होता है उसे थोड़ा बहुत काम भी नहीं मिलता है काम के अभाव में श्रमिक पूरी तरह बेकार रहते हैं इस प्रकार की बेरोजगारी अधिकतर शहरी क्षेत्रों शिक्षित बेरोजगारी के रूप में पाई जाती है.

बेरोजगारी से आम जनता पर पड़ने वाला प्रभाव

बेरोजगारी क्या है: दुनिया के किसी भी देश के लिए बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है और जिस देश में बेरोजगारी ज्यादा है उस देश की विकास दर में भारी गिरावट आती है क्योंकि बेरोजगारी का सीधा प्रभाव उस देश की जनता पर पड़ता है.

यदि किसी देश में बेरोजगारी काफी ज्यादा है तो फिर वहां की सरकार के ऊपर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है चलिए हम आपको बता देते हैं कि बेरोजगारी से किस तरह का प्रभाव जनता पर पड़ता है.

बेरोजगारी से मानवीय साधनों की हानि होती है

किसी देश में बेरोजगारी ज्यादा है तो उस देश के मानवीय साधनों की हानि होती है इसका बहुत ही बुरा प्रभाव उस देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है क्योंकि उस देश की आम जनता का समय बेरोजगारी के फलस्वरूप बर्बाद होता है.

बेरोजगारी से निधर्नता मे वृद्धि होती है

बेरोजगारी की अवस्था में मनुष्य की आय का कोई साधन नहीं होता है वह निर्धन हो जाता हैं बेरोजगारी के बढ़ने पर निर्धनता भी बढ़ती है लोग कर्जदार हो जाते हैं उनकी आर्थिक समस्याएं बढ़ती हैं.

सामाजिक समस्याएँ होती है

बेरोजगारी के फलस्वरूप कई प्रकार की सामाजिक समस्याएं जैसे बईमानी, अनैतिकता, शराबखोरी,जुएबाजी, चोरी-डकैती उत्पन्न होती है इसके फलस्वरूप सामाजिक सुरक्षा को खतरा पैदा हो जाता है देश में अव्यवस्था उत्पन्न हो जाती है.

राजनीतिक अस्थिरता होती है

बेरोजगारी के फलस्वरूप दुनिया के किसी भी देश में राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न हो जाती है बेरोजगार व्यक्तितोड़-फोड़ तथा अन्य आतंकवादी कार्य करने लगते हैं उनका प्रजातन्त्रात्मक मूल्यों पर से विश्वास खत्म हो जाता है.

बेरोजगार लोग सरकार को निकम्मी समझने लगते हैं जिसे फिर वे बदलने का प्रयत्न करने लगते हैं राजनीतिक अस्थिरता के कारण देश का आर्थिक विकास कठिन हो जाता है.

बेरोजगारी से औद्योगिक संघर्ष होता है

दुनिया के किसी भी देश में बेरोजगारी तथा इसी प्रकार की अन्य बेरोजगारियों के कारण औ़द्योगिक संघर्ष उत्पन्न होते हैं इसका श्रमिकों व मालिकों के सम्बन्धों पर बुरा प्रभाव पड़ता है.

बेरोजगारी से मजदूरों का शोषण होता है

बेरोजगारी के कारण सभी श्रमिकों का शोषण होता है जिन श्रमिकों को रोजगार मिलता भी है उन्हें भी कम मजदूरी व प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण काम करना पड़ता है.

किस देश में बेरोजगारी ज्यादा है

इस सवाल का सीधे तौर पर तो जवाब देना मुश्किल है क्योंकि दुनिया में कई देश है जिनमें में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है हमारे देश भारत में भी बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है बेरोजगारी से निपटने के लिए हमारे देश की सरकार और राज्य सरकार भी इसके लिए कड़े कदम उठाती है.

मौजूदा समय में भारत देश में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है जिस से निपटने के लिए सरकारें भी बहुत कुछ करती है और मौजूदा कुछ सरकारों ने बेरोजगारी भत्ता नामक योजना की शुरुआत की है.

बेरोजगारी भत्ता क्या है

इस योजना का फायदा उन लोगों को हो सकता है जिनके पास कोई काम नहीं है और वह काम करने के इच्छुक हैं लेकिन फिर भी उन्हें कोई काम नहीं मिल पाता है ऐसे लोगों को सरकार के द्वारा बेरोजगारी भत्ता मिलता है.

बेरोजगारी भत्ता योजना से हमारे देश के कई राज्यों में युवा वर्ग को इसका फायदा होता है लेकिन यहां पर में कहना चाहूंगा कि सरकार को इसके बजाये बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने के बारे में ही सोचना चाहिए.

मेरा यह मानना है कि बेरोजगार भत्ता योजना इस समस्या का हल नहीं है इसलिए हमारे देश की सरकार और राज्य सरकार पर विशेष यह जिम्मेदारी है कि वह हमारे देश के बेरोजगारों के बारे में सोचे और उनके हित में फैसले करें ताकि हमारे देश से भी बेरोजगारी पूरी तरह से दूर हो जाए.

क्या किसी देश में बेरोजगारी ज्यादा आबादी से होती है

बेरोजगारी क्या है: जाहिर सी बात है किसी देश में ज्यादा आबादी होगी तो उस देश में बेरोजगारी भी होगी क्योंकि ज्यादा आबादी होने से बेरोजगारी होने का खतरा ज्यादा होता है क्योंकि ज्यादा लोगों को काम नहीं मिल पाता है.

इसलिए मेरा यह मानना है कि ज्यादा आबादी वाले देशों में बेरोजगारी हो सकती है इसीलिए दुनिया के देशों को इस बारे में भी सोचना चाहिए कि अपने देश की आबादी को वह कैसे नियंत्रण कर सकता है.

बेरोजगारी दूर करने के उपाय क्या है

अब आप यह तो समझ ही चुके हैं कि बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है और इसे दूर करना आवश्यक है तो चलिए हम आपको इसे दूर करने के कुछ उपाय के बारे में जानकारी देते हैं.

बेरोजगारी दूर करने का जो सबसे पहला उपाय है कि सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो आम जनता के हित में हो और उन्हें काम मिल सके इसलिए सरकारों को यह सोचना चाहिए कि बेरोजगारी भत्ता जैसी योजनाओं से बेरोजगारी दूर नहीं हो सकती है बल्कि बेरोजगारी तभी दूर हो सकती है जब देश के हर नागरिक के पास काम हो.

मेरा यह मानना है कि जिस देश ने टेक्नोलॉजी का ज्यादा उपयोग किया है और उस देश में आबादी ज्यादा है उस देश में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या के रूप में उबरी है.

कम जनसंख्या वाले देश टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि वहां पर जनसंख्या काफी कम है और वहां के सभी लोगों को काम मिल जाता है लेकिन हमारे देश भारत में तो आबादी ज्यादा है इसलिए यदि हमारे देश में ज्यादा तकनीकी अपनाया तो फिर बेरोजगारी भी ज्यादा बढ़ने वाली है.

इसीलिए हमारे देश में टेक्नोलॉजी और मशीन का उपयोग कम करना चाहिए और देश की सरकार को जनसंख्या नियंत्रण के बारे में सोचना चाहिए तभी हमारे देश से बेरोजगारी दूर हो सकती है.

आज की इस पोस्ट में हमने आपको बेरोजगारी क्या है इस बारे में बताने का प्रयाश किया है हम से इस पोस्ट में कोई गलती हुई हो या कोई जानकरी गलत दी हो तो फिर उसके लिए हम माफ़ी मांगते है.

2 COMMENTS

  1. बेरोजगारी तो ही आदमी को नई मुकाम तक ले जाती हैं कुछ लोग महान बन जाते है और कुछ लोग शैतान _bahu aacha post hai.

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